Friday, January 13, 2012

शुक्र है..शुक्रवार है..#32


पिलाए जा, पिलाए जा, पिलाए जा साक़ी,
पिलाए जा, हैं जब तलक मेरी सांसें बाक़ी,
किसे पड़ी है के ढूंढे कोई वजहा, थम के,
पिला खुशी में खुशी की, या ग़म मे ग़म के,
है जितनी भी शराब, सारी कर दे नाम मेरे,
तू खाली होने से पहले ही, भर दे जाम मेरे,
कोई भी हद ना बता, घर को नहीं जाना है,
मेरा बस यार इक तू, मयकदा ठिकाना है,
पिलाए जा, ना तू महबूब है, ना माँ, साक़ी,
पिलाए जा, हैं जब तलक मेरी सांसें बाक़ी..

15 comments:

  1. बहुत खूब बॉस।

    शुक्र है शुक्रवार है यह मेरा तकिया कलाम हुआ करता था जब मैं बिग बाज़ार मे अनाउंसर था।

    आपकी पोस्ट और ब्लॉग बहुत अच्छा लगा।

    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. Bahut bahut shukriya sir... :)
      Mujhe khushi hai ki aapko pasand aaya.. :)

      Delete
  2. Replies
    1. Bahut bahut bahut dhanyawad sir.. :)
      aap jaise sthaapit lekhako ke protsaahan ke sahaare aage bhi achchaa likhne ki apni poori koshish karunga.. :)

      Delete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  4. It is awesome dude...no word to say...

    your are heartily invited to My blog...

    ReplyDelete
  5. कल 20/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete