Tuesday, November 22, 2011

इतना भी मैं 'घायल' नहीं हूँ..



मैं तूफ़ां हूँ जले दिल का, कोई बादल नहीं हूँ,
कफ़न हूँ इश्क़ का मैं, माँ का मैं आँचल नहीं हूँ..

दग़ा देकर मुझे, आगे मेरे मासूम ना बन,
ये माना इश्क़ में पागल-हूँ-मैं, पागल नहीं हूँ..

भुलाने में मुझे लग जाएगी ता-उम्र तेरी,
गुज़र जाए जो पल भर में, के मैं वो पल नहीं हूँ..

कभी रस्ते में ग़र मिल जाऊं, तो बचके ग़ुज़रना,
बवंडर बन गया हूँ, अब ज़रा हलचल नहीं हूँ..

सहारे की ना मुझसे अब कभी उम्मीद रखना,
मैं ख़ुद मुश्किल हूँ तेरी, मुश्किलों का हल नहीं हूँ..

कोई जब तोड़ दे दिल, तो ना मेरे पास आना,
तू मेरा कल थी, लेकिन अब मैं तेरा कल नहीं हूँ..

तेरे हर वार का बदला मैं तुझसे गिन के लूंगा,
ज़ख़्म कितने भी हों, इतना भी मैं 'घायल' नहीं हूँ..


2 comments: