Friday, November 9, 2012

इश्क़ करने का बहाना मांगिए..



इश्क़ क्या, क्यूं, कब, कहां, कैसे, वजा* ना मांगिए,
मांगिए तो इश्क़ करने का बहाना मांगिए..

ज़िंदगी कट जाएगी, चैन-ओ-सुकूं से आपकी,
इक बड़े से दिल में, कोने का ठिकाना मांगिए..

कामयाबी ख़ुद चली आएगी, चलिए तो सही,
घर की दीवारों से, मंज़िल का पता ना मांगिए..

है नई शै* की चमक, बस तब तलक, जब तक नई,
उम्र भर रौनक की ख़ातिर, कुछ पुराना मांगिए..

आपने कल चाँद मांगा, हमने वो भी ला दिया,
पर ख़ुदा के वास्ते, हमसे ख़ुदा ना मांगिए..

इश्क़ हमको आपसे है, था, रहेगा भी सदा,
पर सनम ताज़ा मुहब्बत का मज़ा ना मांगिए..

मौत भी, जिसको सुने तो, सर झुकाए शर्म से,
ज़िंदगी के इस सफ़र से, वो फ़साना मांगिए..

ग़र ये अंदाज़-ए-बयां, लगता है अच्छा आपको,
आप 'घायल' के लिए, ग़म का ख़ज़ाना मांगिए..


*वजा - वजह
*शै - Object

17 comments:

  1. बेहतरीन सुन्दर गज़ल.

    ReplyDelete
  2. Khuda se dua hai har hasi aur khushi mile aapko,
    chaahe to meri jaan bhi dedu par meri mohabbat ka Mol na maangiye! :) Gustaakhi Maaf . Your poetry jst tempts me also to give a try (feeble one) and this one is my fav till now ! one of the best \m/ ATB

    ReplyDelete
  3. आपने कल चाँद माँगा, हमने वो भी ला दिया
    पर खुदा के वास्ते, हमसे खुदा ना मांगिये

    बहुत खूब.

    ReplyDelete

  4. दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    कल 12/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  5. बहुत ही सुन्दर रचना....
    आपको सहपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ..
    :-)

    ReplyDelete
  6. sundar prasturi,deepawli ki hardik subhkamnaye

    ReplyDelete
  7. अब गमों का खजाना तो हमारे पास था..जिसे हमने दफन कर दिया था पर उसपर घासफूस के साथ एक बड़ा सा बरगद का पेड़ भी उग आया...। अब क्या है कि पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ो की बलि नहीं दी जा सकती ..इसलिए ये खजाना तो आपको दे नहीं सकते हम। हां बड़े दिल वाला हैं हम..मगर औऱ कोई मिले तो बता दीजिएगा...

    ReplyDelete
  8. वाह क्या कहने ...
    आपकी गज़ल पर वारी जाऊं मैं
    बड़ी खूबसूरती के साथ पेश किया है गजल का हर एक शेर ...

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://rohitasghorela.blogspot.in/2012/12/blog-post.html

    ReplyDelete
  9. Very sweet poem at front i like it dear.

    ReplyDelete
  10. Very Happy New Year. Makar Sakranti aur Lohdi ki Hardik Shubhkamnayein!

    ReplyDelete
  11. Thanks a million and please keep up the enjoyable work.

    ReplyDelete
  12. :) hey u r nominated for Liebster Award here http://shvetasp.blogspot.in/2013/03/thank-you.html

    ReplyDelete
  13. कामयावी खुद चली आएगी चलिए तो सही .... बहुत दमदार

    ReplyDelete
  14. Great Thought. Sometimes you can get on asking but not all the times. You have to come out from closets to see the world with your own eyes. Regards.

    ReplyDelete
  15. This is the precise weblog for anybody who needs to seek out out about this topic. You notice so much its almost arduous to argue with you. You positively put a brand new spin on a subject that's been written about for years. Nice stuff, simply nice!

    ReplyDelete