Wednesday, May 1, 2013

आज फिर आँख भर गई होगी..


आज फिर आँख भर गई होगी,
उसको मेरी ख़बर गई होगी..

मेरी यांदों की धूल में लिपटी,
हाय कैसे वो घर गई होगी..

रात ख़्वाबों में देख कर मुझको,
सोते-सोते संवर गई होगी..

बारहा बेहया सवालों से,
जीते जी फिर से मर गई होगी..

इक तरफ़ प्यार इक तरफ़ रस्में,
नंगे पांवों गुज़र गई होगी..

अश्क़ पीकर, नज़र झुका कर के,
सबके दिल में उतर गई होगी..

चाय की प्यालियां संभाले, ख़ुद,
होके टुकड़े बिखर गई होगी..

कहते-कहते कबूल है क़ाज़ी,
रहते-रहते मुक़र गई होगी..

17 comments:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 02/05/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  2. बहुत ही सुंदर गज़ल, वाह !!!!!!!!!!!!

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  3. वाह बेहतरीन गजल
    धूल से लिपटी यादों के सात घर जाना
    प्यार का महीन अहसास
    बधाई
    उत्कृष्ट प्रस्तुति



    आग्रह है मेरे ब्लॉग का भी अनुसरण करें
    jyoti-khare.blogspot.in
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

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  4. दर्द और सिर्फ दर्द .....!!!!

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  5. कितना अनिश्चित सब-कुछ!

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  6. Gr8 lines.
    Paritosh
    www.dr3vedi.blogspot.in

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  7. द्वन्द और दर्द का समन्वय!

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  8. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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  10. सुंदर...मौज्जाँ ही मौज्जाँ!!

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  11. Haan aaj bhi jab tera zikr aata hai to dil bhar jaata hai . . Aisa lagta hai jaise kal ki hi to baat hai

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