Thursday, March 1, 2012

ज़िंदगी क्या है..


मैं तुझको आज बताता हूं, के कमी क्या है,
तू मुझको आज ये बता, के ज़िंदगी क्या है..

ये ऊंच-नींच, जात-पात, ये मज़हब क्यूँ हैं,
ये रंग-देश, बोल-चाल, बंटे सब क्यूँ हैं,
तू-ही हर चीज़, तो फिर पाक़-ओ-गंदगी क्या है..

किसी पत्थर को पूज-पूज, नाचना-गाना,
सुबह-ओ-शाम, तेरा नाम, लेके चिल्लाना,
तेरा यकीं या ढोंग, तेरी बंदगी क्या है..

किसी को देके चैन, दर्द में सुकूं पाना,
किसी को देके दर्द, ज़ुल्म करके मुस्काना,
हंसी अपनी या तड़प ग़ैर की, खुशी क्या है..

कोई दरिया लिए दिल में है, मग़र हंसता है,
कोई देता है दहाड़ें, तो होंठ कसता है,
निरा बाज़ार नकल्लों का है, असली क्या है..

सिवा इंसान, मारे उतना जितना खा पाए,
यही बस एक, जितना खाए, भूख बढ़ जाए,
ना जाने कौन जानवर है, आदमी क्या है..

कोई नख़रे में हो नाराज़, और ना बात करे,
कोई क़ाबिल, किसी मजबूर का ना साथ करे,
है बेबसी या गुनाह, या है बेरुखी, क्या है..

जिसे नदिया मिली बहती, वो चाहे दरिया को,
जिसे इक बूंद नहीं, ताके वो गगरिया को,
है दुआ कौन खरी, सच्ची तिश्नगी क्या है..

किसी को दिल में बसा लेना, उम्र भर के लिए,
किसी नए का साथ, हर नए सफ़र के लिए,
है क्या बला ये इश्क़, और-ये दिल्लगी क्या है..

मैं तुझको कब तलक गिनाऊं, के कमी क्या है,
तू मुझको अब तो ये बता, के ज़िंदगी क्या है..


**************************************
एक मक़ता इस नज़्म से अलग, पर इसी क़ाफ़िए पर:

"कोई शायर है, या पागल है, दिवाना है कोई,
ये जिसका नाम है 'घायल', ये वाक़ई क्या है.."
**************************************

28 comments:

  1. वाह वाह ...एकदम लाजवाब लिखा है आपने।

    सादर

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना, शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  3. बहूत हि सुंदर सार्थक रचना है
    बेहतरीन अभिव्यक्ती

    ReplyDelete
  4. वाकई बेमिसाल रचना ! आदित्य जी आपकी कलम में जादू है !

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर भाव| होली की शुभ कामनाएं|

    ReplyDelete
  6. Hi,
    First thanks for voting my post.
    I liked your verse very much.
    Sorry that I am not fluent in Hindi to write back.

    Namaste.

    ReplyDelete
  7. वाह!!!
    हर शेर लाजवाब..सोचने को मजबूर करता हुआ...
    दाद कबूल करिये..

    ReplyDelete
  8. वाह...हम भी अब तक न समझ सके हैं कि जिंदगी क्या है... बड़ा मुश्किल है इसे समझना...

    ReplyDelete
  9. लगता है बहुत रिसर्च की है आपने जिंदगी का पता करने की.
    दिल और दिमाग का खेल है सब
    जो दिमाग ने सोचा और् दिल ने महसूस किया
    बस इतना ही ?
    पर हर दिमाग की सोच और दिल भी तो अलग अलग है.
    तो फिर हर किसी के लिए जिंदगी भी अपनी अपनी.

    सुन्दर और आदित्य प्रस्तुति के लिए आभार,आदित्य जी.
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

    ReplyDelete
  10. यह किसी शोध का परिणाम है अच्छी रचना बधाई

    ReplyDelete
  11. सुन्दर..पोस्ट . होली की शुभ कामनाएं

    ReplyDelete
  12. बहुत सुन्दर. मेरे सामने वाले घर में एक लड़की रहती है जिसका नाम पलछिन है. (मैं उसके दादा सामान हूँ और यही संबोधन मेरे लिए होता है) माता पिता के रखे नाम पर वह अचंभित है.

    ReplyDelete
  13. beautiful! makes us aware of all the contradictions and falsehood of day to day life

    ReplyDelete
  14. इतना आसान कहाँ है जिंदगी को जानना !
    अच्छी ग़ज़ल !

    ReplyDelete
  15. वाह.... बहुत बढ़िया... ताजगी से भरी हुई...

    ReplyDelete
  16. वाह खुबसुरत रचना. दिल को छू गयी.

    ReplyDelete
  17. वाह ...बहुत खूब ।

    ReplyDelete
  18. बहुत अच्छी गज़ल...
    और कई रचनाएँ पढ़ीं...
    बहुत बढ़िया....

    ReplyDelete
  19. बहुत सुंदर सार्थक भाव अभिव्यक्ति,..लाजबाब रचना,...
    आदित्य जी,.फालोवर बन गया हूँ आप भी बने,..

    NEW POST...फिर से आई होली...
    NEW POST फुहार...डिस्को रंग...

    ReplyDelete
  20. वाह !!!!

    बहुत बढ़िया लेखन.....
    i've seen older ones too.....
    too good....
    ragards.

    ReplyDelete
  21. वाह!!!
    बहुत बढ़िया लेखन..

    i've seen the older ones too...
    very good..
    regards.

    ReplyDelete
  22. Sabhi ka bahut bahut bahut dhanyawaad.. :)
    ab to aur bhi mehnat karni padegi..
    ek baar aisi waah-waahi ka ras lag jaaye to phir baar baar mazaa lene ka ji chaahta hai :):)

    ReplyDelete
  23. Nice post thanks Dear !!! cheers !!!

    http://www.bigindianwedding.com/

    ReplyDelete