Friday, September 23, 2011

शुक्र है..शुक्रवार है..#21


कभी तो रीत दुनिया की, मिलन होने नहीं देती,
कभी पैसे की किल्लत, बीच की दूरी बढ़ाती है,
करे देरी से मिलने पर भी, नख़रा ना गिला कोई,
मेरे महबूब से बेहतर तो मेरी बोतल-ए-मय है..
 

Wednesday, September 21, 2011

कुछ तो जवाब दे दे..



इस बार उर्दू के थोड़े मुश्क़िल लफ़्ज़ों का इस्तमाल किया है.. उनका मतलब रचना से पहले ही लिख़ रहा हूं.. ताकी पढ़ने में आसानी रहे.. :)
   
  आब :      Splendor        ||          शबाब : Youth
     सवाब :      Reward          ||          वाइस : Preacher
           अज़ाब :     Punishment   ||           बाब : Topic/Subject
   इज़्तराब :   Restlessness  ||          इंतख़ाब : Choice


खुशी दे रूह को, चेहरे को मेरे थोड़ा आब दे दे,
मेरे जीने की चाहत को-भी, थोड़ा सा शबाब दे दे,
तू बाक़ी कुछ भी दे, या ना दे, बस इतना रहम कर दे,
समझ भारी पड़े दिल पे मेरे, ऐसा सवाब दे दे..

ऐ वाइस, मुझको मेरी ज़िन्दगी का तू हिसाब दे दे,
गिना दे सब गुनाह मेरे, हर-इक का तू अज़ाब दे दे,
मुझे तड़पा, जला, या दे डुबा, जो करना है तू कर,
फ़टाफ़ट फ़ैसला दे, फिर ज़रा थोड़ी शराब दे दे..

मेरे महबूब कुछ तो गुफ़्तगू का, मुझको बाब दे दे,
मेरी कमियां गिना, रुस्वा हो, मुझको इज़्तराब दे दे,
बढ़ी ख़ामोशियां अक़्सर, ग़लत-फ़हमी बढ़ाती हैं,
सवालों का सवालों से सही, कुछ तो जवाब दे दे..

ख़ुदा दुनिया तेरी आए समझ, ऐसी किताब दे दे,
सभी को दे भला, और बस मुझे, जो हो ख़राब दे दे,
मेरी किस्मत में जो भी है लिखा, मुझसे बिना पूछे,
कमस्कम मौत के ज़रियो में-ही, कुछ इंतख़ाब दे दे..


Saturday, September 10, 2011

टुकड़े इतने छोटे हों..


मेरे महबूब गर दिल तोड़ना मेरा, तो कुछ ऐसे,
के टुकड़े इतने छोटे हों, जो फिर तोड़े से ना टूटें..

Friday, September 9, 2011

शुक्र है..शुक्रवार है..#20



नई सी अब कोई भी आरज़ू, दिल में नहीं खिलती,
मुझे भूसे में ग़म के, खुशियों की सूंई नहीं मिलती,
बहुत कोशिश की मैने, ये जहां पर ना समझ आया,
पिला तू और साक़ी, होश में दुनिया नहीं झिलती..

Tuesday, September 6, 2011

यही होना था शायद, हो गया है..



यही होना था शायद, हो गया है..
हंसी लब पे है, और दिल रो गया है,

जो मेरा है वो लुट जाता, तो क्या था,
जो पाया भी नहीं था, वो गया है..

अधूरे ख़्वाब, झूठी आस पे दिल,
युंही कब तक धड़कता, सो गया है..

कोई मिलके जुदा होता, तो होता,
जो आया ही नहीं था, वो गया है..

लहू अपने से जिसके बाग़ सींचे,
वो काँटे कब्र पे, क्यूं बो गया है..

हज़ारो ज़ख़्म, 'घायल' किसको देखे,
जिसे देखा, हरा ही हो गया है..


Friday, August 26, 2011

शुक्र है..शुक्रवार है..#19



सजाओ महफिलें मय की, तो दिल की बात कहूं,
पिलाओ जाम दो ज़रा, तो दिल की बात कहूं..

अभी तो होश में हूं, दिल भला कैसे खोलूं,
ज़रा मय का असर बढ़े, तो दिल की बात कहूं..

छुपे से कुछ अरमां, और दुबकती आरज़ू हैं,
दबे जज़्बात जगाओ, तो दिल की बात कहूं..

ना सर से, और ना कंधे से बनेंगी बातें,
जो दिल पे हाथ रखो तुम, तो दिल की बात कहूं..

बिना मय के बड़ी घबराहटें सी हैं 'घायल',
ज़रा डर सा चला जाए, तो दिल की बात कहूं..


Thursday, August 4, 2011

माँ का न व्यापार करो




बेच रहे जो भारत को, उनकी न जय-जय कार करो,
पुत्र हो जिस भूमी के तुम, उस माँ का न व्यापार करो..

जिसकी मिट्टी के आंचल में, खेल कूद कर बड़े हुए,
बने नपुंसक, उसके सीने पर बिन लज्जा खड़े हुए,
भारत माँ के हर शत्रू का, आगे बढ़ संहार करो,
पुत्र हो जिस भूमी के तुम, उस माँ का न व्यापार करो..

अब कपूत भी, हैं सपूत का, भेस-ही धारण किये हुए,
ऋषि रूप में छलते दानव, रक्त पिपासा लिए हुए,
जग समक्ष तुम सत्य दिखाकर, इन दुष्टों पर वार करो,
पुत्र हो जिस भूमी के तुम, उस माँ का न व्यापार करो..

दो सौ वर्षों के घावों को सह कर भी, जो डटी रही,
टुकड़े-टुकड़े कर डाले, पर टुकड़ों में भी सटी रही,
उस चिड़िया के स्वर्ण-पंख, लौटाने की हुंकार भरो,
पुत्र हो जिस भूमी के तुम, उस माँ का न व्यापार करो..

वचन अधूरा न छोड़ो, तुम कर्म अधूरा न छोड़ो,
बन सुपुत्र कर्तव्य निभाओ,  धर्म अधूरा न छोड़ो,
नव-निर्माण करो भारत का, हर बाधा को पार करो,
पुत्र हो जिस भूमी के तुम, उस माँ का न व्यापार करो..

बेच रहे जो भारत को, उनकी न जय-जय कार करो,
पुत्र हो जिस भूमी के तुम, उस माँ का न व्यापार करो..!!